आत्मनिर्भर भारत-2020
Atmnirbhar Bharat-2020
आत्मनिर्भर भारत अभियान क्या है?
आत्मनिर्भर भारत अभियान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
ने राष्ट्र के नाम संबोधन में 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक
पैकेज का ऐलान कर दिया। पीएम ने इसे 'आत्मनिर्भर भारत पैकेज’ नाम दिया है। यह आर्थिक पैकेज
मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है, क्योंकि कोरोना वायरस और
लॉकडाउन के कारण सुक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों पर
बहुत बुरा असर पड़ा है। इस आर्थिक पैकेज से गरीब मजदूरों, कर्मचारियों के साथ ही होटल तथा टेक्सटाइल
जैसी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को फायदा होगा। जानिए क्या है पीएम मोदी का
आत्मनिर्भर भारत प्लान, और 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज में किसे क्या
मिलेगा.
आर्थिक पैकेज से किस सेक्टर को कितना
फायदा?
सूक्ष्म, लघु और मध्यम
उद्योग: MSME यह वही सेक्टर है जिसे लाकडाउन का सबसे ज्यादा असर पड़ा है, जिन्दी
रोजी-रोटी पर बड़ा संकट छा गया था.
खास जोर:
आत्मनिर्भर भारत के संकल्प
को सिद्ध करने के लिए, इस पैकेज में Land, Labour, Liquidity और Law सभी पर जोर
दिया गया है.
क्या फायदा होगा:
इन सबके जरिए देश के विभिन्न वर्गों को, आर्थिक
व्यवस्था की कड़ियों को, 20 लाख करोड़ रुपए का संबल मिलेगा, सपोर्ट
मिलेगा। 20 लाख करोड़ रुपए का ये पैकेज, 2020 में देश की विकास यात्रा को, आत्मनिर्भर
भारत अभियान को एक नई गति देगा।
क्या है हमारी ताकत:
आज हमारे पास साधन हैं, हमारे पास सामर्थ्य है, हमारे पास दुनिया का सबसे बेहतरीन टैलेंट
है, हम Best Products बनाएंगे, अपनी Quality
और बेहतर करेंगे, सप्लाई चेन को और आधुनिक बनाएंगे, ये हम कर सकते हैं और हम जरूर करेंगे।
मोदी
के 5 पिलर:
Economy
2. Infrastructure 3. System 4. Demography 5. Demand
Economy: एक ऐसी इकॉनॉमी जो Incremental change नहीं बल्कि Quantum
Jump लाए
Infrastructure: एक ऐसा Infrastructureजो आधुनिक भारत की पहचान बने
System: एक ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की रीति-नीति नहीं, बल्कि
21वीं सदी के सपनों को साकार करने वाली Technology
Driven व्यवस्थाओं पर आधारित हो।
Demography: दुनिया की सबसे बड़ी Democracy में हमारी Vibrant
Demography हमारी ताकत है, आत्मनिर्भर भारत के
लिए हमारी ऊर्जा का स्रोत है।
Demand: हमारी अर्थव्यवस्था में डिमांड और सप्लाई चेन का जो चक्र है, जो ताकत है, उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने
की जरूरत है।
सबसे बड़ा मंत्र: आज से हर भारतवासी को अपने
लोकल के लिए ‘वोकल’ बनना है, न सिर्फ लोकल प्रोडक्ट्स खरीदने हैं, बल्कि उनका गर्व से प्रचार भी करना है।
वास्तविकता
जैसे
की मोदी जी ने तालाबंधी (Lockdown) के अवधि में अपने विशेष जनसवांद में घोषणा किये
थे कि वे कुल जीडीपी के 10% भाग "आर्थिक पैकेज" के रूप में देने जा रहे है.
कोरोना काल के चलते लंबे तालाबंधी जिससे पुरे अर्थव्यवस्था
का पहिया रुक गया था और दुबारा इस पहिया को घुमाने के लिये इस विशेष आत्मनिर्भर
भारत आर्थिक पैकेज का पेशकश किया गया था. जिसकी रकम लगभग 20 लाख करोड़ रूपए था,
जिसका मुख्य लक्ष्य था भारत को आत्मनिर्भर बनाना और ग्लोबल लीडर के रूप में खड़े
करना. जिसमें मोदी सरकार कुछ हद तक अपने लक्ष्य को पाने में सक्षम रह जैसे की कुछ
बेहतर उपलब्धियों की बात करे तो “कोविड वैक्सीन” तैयार करना और उसे अन्य देशों में
निर्यात करना, आर्थिक गतिविधियों को पुनः आरम्भ करने में मदद करना, परिवहन सेवाओ
की मंजूरी देना, अस्पतालों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ना इत्यादि बेहतर कार्य
किये गये है.
परन्तु
लगभग 5 महीनों के पश्चात इस आर्थिक पैकेज का समीक्षा शायद ही कोई अर्थशास्त्री
करना चाहे, क्योंकि हमें पता है इस बजट का क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं किया गया
है- इसका लाभ मुख्यतः कुछ ही वर्ग ले पाये है, आकलन करे तो 136.64 करोड़ आबादी वाले
देश में इसका लाभ 10 प्रतिशत से भी कम आबादी ले पाया है.
कोरोना जैसे महामारी से निपटने के लिए अन्य
देशों ने अपने जीडीपी के हिस्सों को दिए है, जिसमे जापान सबसे आगे है- कुछ अकड़े
जापान 21%, मलेशिया 17%, अमेरिका 13%, स्वीडन 12%, जर्मनी 10.7%, और भारत 10%. तो इस बात पर जोर देना व्यर्थ है कि 10 प्रतिशत जीडीपी का
क्योंकि ये काम और भी देशों ने किया है, जिनकी जीडीपी हमारे देश से कई गुना ज्यादा
है और उनकी आबादी हमसे भी कम है.
हम
बात करे सूक्ष्म, लघु और मध्यम
उद्योग की जिसमे कोई ख़ास इज़ाफा तो नहीं दिखा, जितना सरकार ने ज़ोर देकर कहा था.
किसान भी अपने मांगों को लेकर 3 महीना से धरने पर बैठे है, उनको कोई उचित समाधान
नहीं मिला रह है,, यदि पांचों पिल्लरों की बात करे तो वह आज भी वैसे की वैसे खड़ा है जैसे पिछले कुछ दशको से खड़ा था.
बेरोजगारी और महगाई तो इस आर्थिक पैकेज के बाद भी असमान छू रह है, लेकिन सरकार
कोरोना के आड़ में छुप रहे है. जनता द्वारा दिया गया Covid Relife Fund उसके बारे में कोई बात नहीं कर सकता यह
अपारदर्शिता है. इस सर्वव्यापी महामारी ने हमारे सरकार की सारी व्यवस्थाओं का
पूर्ण रूप से खंडन किया है – शिक्षा व्यवस्था ठप, यातायत सुविधा ठप , स्वस्थ
व्यवस्था ठप सारी के सारी व्यवस्थाये ठप, कांह
जा रहे है ये फण्ड सारे इसके बारे में कोई बात नहीं करना चाहता.
सच में आज पूरे देश को आत्मनिर्भर बनना ही
होगा, न कोई सरकार ना कोई चुनाव, तब जाकर सरकार और जनता को समझ में आयेगी
आत्मनिर्भर क्या होता है. हो सकती है मेरी बातों से कुछ लोग सहमत नहीं होंगे
उन्हें सुझाव और सलाह देने की पूर्ण अधिकार है .
धन्यवाद्.....!!

