"The Forest of India"
भारत जो वनों का देश है, जहाँ आज भी कई राज्यों में सैकड़ो मीलों तक घने वन का विस्तार है. यहाँ की जैवविविधता भी एक दुसरे से अलग है कही वर्षा वनों से भरे ऊँचे-ऊँचे पेड़ तो कही शुष्क कटीले झाड़ियो का प्रसार. भारतीय वन सर्वेक्षण (2019) के अनुसार देश में वनों एंव वृक्षों से अच्छादित कुल क्षेत्रफल 8,07,276 वर्ग किमी है जो भौगोलिक दृष्टि से 24.56 प्रतिशत है. मध्यप्रदेश क्षेत्रफल के अनुसार सबसे बड़ा वन आवरण राज्य है, जो अपनी भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 25.14 प्रतिशत भाग में फैला हुआ है. इन विशाल वनों के अध्यन व रिपोर्ट तैयार करने हेतु भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग जैसी सरकारी संस्था भी कार्यरत है जो वन स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करता है, और इन में रहने वाली वन्य जीव तथा वनवासियों/आदिवासियों के लिए भी विशेष कानून पारित है, जिनके आजादी और संरक्षण के लिए सरकार ने वनाधिकार अधिनियम और वन्यजीव अभयारण्य बनाये गये है. तो आइये विस्तार से समझते है हमारी अतुल्य भारत की अमूल्य वनों के बारे में-
भारत वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR-2019)
भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग (Department of Indian forest Survey) पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय केंद्र की ऐसी संस्था है जो समय-समय पर पुरे देश की वन स्थिति की सर्वेक्षण करवाती है, इस संस्था की स्थापना वर्ष 1987 में हुई थी व मुख्यालय देहरादून (उतराखण्ड) में स्थित है.
ISFR-19 के अनुसार वनों की स्थिति से संबंधित राज्यवार आँकड़े
इन वनवासियों के पास क़ानूनी तौर पर कोई अधिकार नहीं था कि वे यह रह सके उनके पास कोई सरकारी कागजात व अधिकारिक पट्टा नहीं होने के कारण उन्हें इन क्षेत्रोँ बेदखल करने लगे थे.
इन सभी परेशानीयों को देखते हुआ, सांसद ने उनके हक़ के लिये सुप्रीम कोर्ट पर मुकदमा दायर किया गया,
दिसम्बर 2006 में उनकी मांगों को समझी गई और एक नया कानून व्यवस्था बनाया गया जिसे वनाधिकार अधिनियम 2006 (Forest Right Act 2006) कहा जाता है.
1 जनवरी 2008 को तत्कालीन ने सरकार ने इसे पुरे देश में लागू करने का (जम्मू-कश्मीर को छोड़ कर) एतेहासिक फैसला सुनाया गया.
👉13 दिसम्बर, 2005 से पूर्व वन भूमि रहने वाले वनवासियों को वनों में रहने और आजीविका का अधिकार मिला.
👉उन्हें प्रमाणित दस्तेवाज दिया जायेगा जो आनेवाली पीढ़ी के लिए सत्यापन का मुलपत्र होगा.
👉मौलिक अधिकारों व सरकार द्वारा दिए जाने वाले लाभों से से जोड़ा जायेगा.
👉उनके रहवास तक जरुरी संसाधनों का पहुच होगा जैसे – सड़क, बिजली, संचार, भोजन आदि
👉वन क्षेत्रो की क़ानूनी मामलो को ग्राम सभा और ग्राम पंचायत के दायित्व में छोड़ा गया इसमें कोई बाहरी हस्तक्षेप नहीं कर सकता.
वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary)- सरकार जब भौगोलिक दृष्टी से किसी बड़े वन क्षेत्र को वह रह रहे जीव-जन्तु व प्रकृतिक संपदा को संरक्षित करने के लिए मानवीय अतिक्रमण पर रोक लगाती है, किसी भी वाव्सयिक गतिविधि के लिए जंगल व जंगल में रह रहे किसी भी प्रजाति को नुकसान नहीं पंहुचा सकते.
जंगल में प्रवेश की अनुमति सिर्फ वाह के स्थानीय निवासियों को होती है जिनकी जीवन-यापन के साधन उन जंगलों से जुडी होती है. यदि किसी स्थानीय निवासी की भू-भाग व खेत अभ्यारण्य सीमा के अन्दर आ जाती है, तो उसे अभ्यारण्य द्वारा बनाये गए नियमो का पालन करना पड़ता है.
राष्ट्रीय उद्यान (National Park)- राष्ट्रीय उद्यान का भी उदेश्य वनों और वनों में रहने वाले जीव-जंतु को संरक्षित करना होता है, परन्तु राष्ट्रीय उद्यान के नियम वन्यजीव अभ्यारण्य के मुकाबले कठोर होते है. यह पर किसी भी प्रकार भी मानवीय गतिविधियों का अनुमति नहीं होती है. यह पर स्थानीय लोगों को भी प्रवेश की अनुमति बिलकुल नहीं होती है, यह जगह जानवरों के सुरक्षा के लिहाज से बेहतर जगह होती है.
यदि वन्यजीव अभ्यारण्य में मानवीय अतिक्रमण नहीं रुकने की दशा में सरकार को राष्ट्रीय उद्यान बना सकती है, परन्तु राष्ट्रीय उद्यान संतोषजनक स्थिति में पाये जाने पर उसे नहीं घोषित नहीं कर सकती है.
सरकार चाहे तो किसी भी संकटग्रस्त जानवर को अभ्यारण्य से राष्ट्रीय पार्क में छोड़ सकती है तथा राष्ट्रीय पार्क में जानवरों के भोजन और इलाज के लिए भी सुविधा होती है.
(भारत के प्रमुख वन्यजीव अभ्यारण्य और राष्ट्रीय उद्यान)
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राष्ट्रीय उद्यान |
राज्य |
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पेरियार और शांत घटी |
केरल |
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बांधवगढ़ और कान्हा |
मध्यप्रदेश |
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गुगामल और संजय गाँधी |
महाराष्ट्र |
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सिरिस्का और रंथाम्बौर |
राजस्थान |
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कार्बेट और नंदादेवी |
उतराखण्ड |
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दुधवा |
उत्तर प्रदेश |
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कांगेर
घटी और इन्द्रावती |
छत्तीसगढ़
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सुंदरबन |
प. बंगाल |
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फूलो की घाटी |
उतराखण्ड |
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पन्ना और सतपुड़ा |
मध्यप्रदेश |
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गिर
और काला हिरण |
गुजरात
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ग्रेट हिमलयान |
हिमाचल प्रदेश |
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हेमिस |
लद्दाख |
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वन्यजीव अभ्यारण्य |
राज्य |
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पंचमढ़ी |
मध्यप्रदेश |
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भगवान
महावीर |
गोवा |
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सत्कोसिया
और चिल्का झील |
ओडिशा |
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गौतम
बुद्ध (गया) |
बिहार |
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हजारीबाग
और पलुम |
झारखण्ड |
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चंद्रप्रभा
(वाराणसी) |
उत्तर
प्रदेश |
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माउन्ट
आबू |
राजस्थान |
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गरमपनी |
असम |
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नागार्जुन
सागर श्रीशैलम और पुलीकट |
आंध्रप्रदेश |
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भद्रा
और दंदेली |
कर्नाटक |
|
गोविन्द
सागर |
हिमाचल
प्रदेश |






