विश्व
गौरेय दिवस || World Sparrow Day
(20 March)
आज का दिन उस मेहमान के नाम जो, कभी हमारे घर के आंगन, छतों और खेतो में चहकती-फुदकती दिखाई देती थी. जी हाँ आप समझ गये होंगे? गौरेय पक्षी (House Sparrow) जिसे हम बचपन से देखते आ रहे है, जिसकी चीं-चीं की आवाज़ से हमारी सुबह और शाम होती थी, वह मेहमान जो हमें कभी अकेले नहीं होने देते थे. पर आज हमारे घर-आंगन के शोभा बढ़ने वाले वे मेहमान न जाने कह चले गये, हम उन्हें याद करने के लिये व उनके प्रजाति को संरक्षित करने के लिए हम हर वर्ष 20 मार्च को “विश्व गौरेय दिवस” (World Sparrow Day) के रूप में मानते है. तो.....आइये हम जानते है इसके कुछ महत्वपूर्ण बाते.
World Sparrow Day 2021 Theme #I_LOVE SPARROWS
गौरेय के बारे
में (About
House Sparrow)
·
गौरेय
का वैज्ञानिक नाम पास्सेर डोमेस्टिकस (Passer
domesticus) है.
·
विश्व
भर में गौरेय की सैकड़ो प्रजाति पाई जाती है जो, रंग-रूप, अकार और वजन में भिन्न
होती है.
·
चिडियों के प्रजातियों
में गौरेय एक ऐसी पक्षी है जो लगभग विश्व के सारे देशों में देखा जा सकता है.
·
विश्व
में गौरेय की एक प्रजाति ‘इटेलियन स्पैरो’ इटली की राष्ट्रीय पक्षी के रूप में जानी जाती है.
·
भारत
की दो राज्य दिल्ली और बिहार की राजकीय पक्षी गौरेय है.
World Sparrow Day 2021 Theme #I_LOVE SPARROWS
गौरेय के बारे
में (About
House Sparrow)
·
गौरेय
का वैज्ञानिक नाम पास्सेर डोमेस्टिकस (Passer
domesticus) है.
·
विश्व
भर में गौरेय की सैकड़ो प्रजाति पाई जाती है जो, रंग-रूप, अकार और वजन में भिन्न
होती है.
·
चिडियों के प्रजातियों
में गौरेय एक ऐसी पक्षी है जो लगभग विश्व के सारे देशों में देखा जा सकता है.
·
विश्व
में गौरेय की एक प्रजाति ‘इटेलियन स्पैरो’ इटली की राष्ट्रीय पक्षी के रूप में जानी जाती है.
·
भारत
की दो राज्य दिल्ली और बिहार की राजकीय पक्षी गौरेय है.
विश्व गौरेय
दिवस (World Sparrow Day) क्यों मनाते है?
·
इसकी शुरुआत 2010 में
हुई थी.
·
दो दशको से विश्व भर में
गौरेय की आबादी 40 प्रतिशत से भी काम रह गई
है.
·
ब्रिटेन की “रॉयल
सोसायटी ऑफ़ प्रोडक्शन ऑफ़ बर्ड्स” ने भारत व विश्व के विभिन्न हिस्सों में शोध के
आधार पर गौरेय को ‘Red List’
में शामिल किया है.
·
गौरेय की घटती आबादी को
देखते हुये विश्व गौरेय संघटन (World Sparrow Organization) की स्थापना किया गया.
·
गौरेय के प्रजातियों को संकटग्रस्त
स्थिति से कैसा बाहर निकला जाये, इस पर विचार करने के लिये.
संकटग्रस्त
होने का कारण (Reason
for Endanger)
मनुष्य अपने आवश्यकताओ
को पूरा करने के लिए पर्यावरण से बहुत ही ज्यादा खिलवाड़ कर रही है. तेज़ी से प्रदूषण
बढ़ने की वजह से मौसम में भी बहुत ज्यादा बदलाव आने लगा है, जिससे गौरेय की प्राकृतिक
आवास पर असर पढ़ रही है.
उनके खतरे में आने का
सबसे कारण है उन्हें अपनी घोसला बनाने के लिए जगह नहीं मिल पाती जिससे बच्चे जन्म
से पहले अण्डों में ही दम तोड़ देती है.
ऐसी स्थिति में हमारी
जिम्मेदारी है कि हम गौरेय के बचाव के लिए जो संभव हो करें उनके घोसले बनाने के
लिए उपयुक्त जगह दें और दाना और पानी अपने घर के किसी सुनिश्चित में रख दे.
गौरेय
नही अपितु सारे पंक्षी जगत के ऊपर यह खतरा मंडरा रही है, ऐसे बहुत सारे पक्षी है जिसे
हम बचपन में देख कौतूहल हो जाया करते थे वे पक्षी धीरे-धीरे हमारे परिवेश से गयब
हो रहे है.
आपके
प्रदेश/इलाके से कोई ऐसे पक्षी जो संकटग्रस्त स्थिति में हो तो उसके बारे में जरुर
बताये, उन्हें संरक्षित करने के लिए लोगों और सरकार से इस विषय पर चर्चा करे. यदि आपके
पास भी इन नन्ही चिडियों को संकटग्रस्त होने से बचाने के कुछ खास उपाये है तो हमें
जरुर बताये.
धन्यवाद....!!
Important
Link For Save our Earth & Birds More Information
about #House SparrowWorld Sparrow Day
Org Save Erath
विश्व गौरेय
दिवस (World Sparrow Day) क्यों मनाते है?
·
इसकी शुरुआत 2010 में
हुई थी.
·
दो दशको से विश्व भर में
गौरेय की आबादी 40 प्रतिशत से भी काम रह गई
है.
·
ब्रिटेन की “रॉयल
सोसायटी ऑफ़ प्रोडक्शन ऑफ़ बर्ड्स” ने भारत व विश्व के विभिन्न हिस्सों में शोध के
आधार पर गौरेय को ‘Red List’
में शामिल किया है.
·
गौरेय की घटती आबादी को
देखते हुये विश्व गौरेय संघटन (World Sparrow Organization) की स्थापना किया गया.
· गौरेय के प्रजातियों को संकटग्रस्त स्थिति से कैसा बाहर निकला जाये, इस पर विचार करने के लिये.
संकटग्रस्त
होने का कारण (Reason
for Endanger)
मनुष्य अपने आवश्यकताओ
को पूरा करने के लिए पर्यावरण से बहुत ही ज्यादा खिलवाड़ कर रही है. तेज़ी से प्रदूषण
बढ़ने की वजह से मौसम में भी बहुत ज्यादा बदलाव आने लगा है, जिससे गौरेय की प्राकृतिक
आवास पर असर पढ़ रही है.
उनके खतरे में आने का
सबसे कारण है उन्हें अपनी घोसला बनाने के लिए जगह नहीं मिल पाती जिससे बच्चे जन्म
से पहले अण्डों में ही दम तोड़ देती है.
ऐसी स्थिति में हमारी
जिम्मेदारी है कि हम गौरेय के बचाव के लिए जो संभव हो करें उनके घोसले बनाने के
लिए उपयुक्त जगह दें और दाना और पानी अपने घर के किसी सुनिश्चित में रख दे.
गौरेय
नही अपितु सारे पंक्षी जगत के ऊपर यह खतरा मंडरा रही है, ऐसे बहुत सारे पक्षी है जिसे
हम बचपन में देख कौतूहल हो जाया करते थे वे पक्षी धीरे-धीरे हमारे परिवेश से गयब
हो रहे है.
आपके प्रदेश/इलाके से कोई ऐसे पक्षी जो संकटग्रस्त स्थिति में हो तो उसके बारे में जरुर बताये, उन्हें संरक्षित करने के लिए लोगों और सरकार से इस विषय पर चर्चा करे. यदि आपके पास भी इन नन्ही चिडियों को संकटग्रस्त होने से बचाने के कुछ खास उपाये है तो हमें जरुर बताये.
धन्यवाद....!!


