हस्ताक्षर संसार के लिए सामान्य बाद है, किन्तु जापानवासियों के लिए नहीं. आपको जानकर आश्चर्य हो सकता है कि जापान में हस्ताक्षर की जगह स्टैम्प का अधिक प्रचालन है.
हस्ताक्षर करना एक आम बात है. तमाम क़ानूनी काम बिना हस्ताक्षर के नहीं किये जा सकते और छोटे-से-छोटे काम में भी हस्ताक्षर आवश्यकता होता है. किन्तु यदि आप जापान में है तो यंह हस्ताक्षर की आवश्यकता आपको नहीं है, क्यूंकि जापान के लोग हस्ताक्षर में अपने नाम के स्थान पर एक विशेष प्रकार के स्टैम्प का उपयोग करते है, जिसे 'इंकन' या 'हैंको' कहते है.
सिर्फ जापान नहीं, कोरिया और चीन के कुछ भागो में भी पहचान के लिए हस्ताक्षर के स्थान पर स्टैम्प का उपयोग किया जाता है.
हस्ताक्षर करना एक आम बात है. तमाम क़ानूनी काम बिना हस्ताक्षर के नहीं किये जा सकते और छोटे-से-छोटे काम में भी हस्ताक्षर आवश्यकता होता है. किन्तु यदि आप जापान में है तो यंह हस्ताक्षर की आवश्यकता आपको नहीं है, क्यूंकि जापान के लोग हस्ताक्षर में अपने नाम के स्थान पर एक विशेष प्रकार के स्टैम्प का उपयोग करते है, जिसे 'इंकन' या 'हैंको' कहते है.
हैंको एक विशेष स्टैम्प होता है, जिस पर कांजी (जापानी अक्षर) में सम्बंधित व्यक्ति का नाम उत्कीर्ण होता है. ये स्टैम्प लकड़ी, हाथी दांत या प्लास्टिक के बने जाते है. इनमे लाल रंग की स्याही का उपयोग होता है जिसे 'शुनिकु' कहा जाता है. यहाँ के दस्तेवाजों पर हस्ताक्षर के लिए कोई लाइन नहीं होती है बल्कि हैंको के स्टैम्प के लिए एक छोटा-सा गोल घेरा होता है. व्यक्तिगत रूप से तथा व्यापार के उद्देश से मुख्यतः तीन प्रकार के हैंको उपयोग में लाया जाता है- जित्सू-इन, गिंको-इन तथा मितोम-इन. जित्सू-इन का अर्थ होता है 'असली सील'. इस स्टैम्प का उपयोग किसी अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के लिए किया जाता है.
गिंको-इन स्टैम्प का उपयोग आर्थिक लेन-देन के लिए होता है और इसे बैंक में पंजीकृत करना आवश्यक होता है, मितोम-इन का उपयोग रोज़ाना के कार्य में होता है, जैसे पार्सल लेन-देन आदि. इस स्टैम्प का कहीं पर भी पंजीकरण करवाना आवश्यक नहीं होता है.
हैंको का यह एक आवश्यक नियम है कि उस पर आपके नाम का कोई न कोई भाग अवश्य होना चाहिये. साथ ही यदि आपका हैंको गुम जाता है या चोरी हो जाता है तो आपको इसकी सूचना तत्काल पुलिस को देनी होता है और हैंको को रद्द भी करवाना होता है.
हस्ताक्षर करना एक आम बात है. तमाम क़ानूनी काम बिना हस्ताक्षर के नहीं किये जा सकते और छोटे-से-छोटे काम में भी हस्ताक्षर आवश्यकता होता है. किन्तु यदि आप जापान में है तो यंह हस्ताक्षर की आवश्यकता आपको नहीं है, क्यूंकि जापान के लोग हस्ताक्षर में अपने नाम के स्थान पर एक विशेष प्रकार के स्टैम्प का उपयोग करते है, जिसे 'इंकन' या 'हैंको' कहते है.
सिर्फ जापान नहीं, कोरिया और चीन के कुछ भागो में भी पहचान के लिए हस्ताक्षर के स्थान पर स्टैम्प का उपयोग किया जाता है.
हस्ताक्षर करना एक आम बात है. तमाम क़ानूनी काम बिना हस्ताक्षर के नहीं किये जा सकते और छोटे-से-छोटे काम में भी हस्ताक्षर आवश्यकता होता है. किन्तु यदि आप जापान में है तो यंह हस्ताक्षर की आवश्यकता आपको नहीं है, क्यूंकि जापान के लोग हस्ताक्षर में अपने नाम के स्थान पर एक विशेष प्रकार के स्टैम्प का उपयोग करते है, जिसे 'इंकन' या 'हैंको' कहते है.
हैंको एक विशेष स्टैम्प होता है, जिस पर कांजी (जापानी अक्षर) में सम्बंधित व्यक्ति का नाम उत्कीर्ण होता है. ये स्टैम्प लकड़ी, हाथी दांत या प्लास्टिक के बने जाते है. इनमे लाल रंग की स्याही का उपयोग होता है जिसे 'शुनिकु' कहा जाता है. यहाँ के दस्तेवाजों पर हस्ताक्षर के लिए कोई लाइन नहीं होती है बल्कि हैंको के स्टैम्प के लिए एक छोटा-सा गोल घेरा होता है. व्यक्तिगत रूप से तथा व्यापार के उद्देश से मुख्यतः तीन प्रकार के हैंको उपयोग में लाया जाता है- जित्सू-इन, गिंको-इन तथा मितोम-इन. जित्सू-इन का अर्थ होता है 'असली सील'. इस स्टैम्प का उपयोग किसी अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के लिए किया जाता है.
गिंको-इन स्टैम्प का उपयोग आर्थिक लेन-देन के लिए होता है और इसे बैंक में पंजीकृत करना आवश्यक होता है, मितोम-इन का उपयोग रोज़ाना के कार्य में होता है, जैसे पार्सल लेन-देन आदि. इस स्टैम्प का कहीं पर भी पंजीकरण करवाना आवश्यक नहीं होता है.
हैंको का यह एक आवश्यक नियम है कि उस पर आपके नाम का कोई न कोई भाग अवश्य होना चाहिये. साथ ही यदि आपका हैंको गुम जाता है या चोरी हो जाता है तो आपको इसकी सूचना तत्काल पुलिस को देनी होता है और हैंको को रद्द भी करवाना होता है.